सात साल से पुलिस थाने के मालखाने में रखी भगवान की मूर्तियों को आखिरकार मंगलवार को न्याय मिल ही गया। फरवरी, 2013 में मंदिर से चोरी हुई मूर्तियां बरामद के बाद से पुलिस थाने के मालखाने में कैद थी। जिसे मंगलवार को कोर्ट के फैसले के बाद फिर से मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
कोर्ट के फैसले के बाद अब सेवग समाज के शांडिल्य गौत्र के लोगों को अपनी कुलदेवी की पूजा-अर्चना करने पुलिस थाने में नहीं आना पड़ेगा। 13 फरवरी, 2013 को कस्बे से चोरी हुई सेवग समाज के शांडिल्य गौत्र की कुलदेवी पीपलाज माता, कुबेर भगवान व गणेश जी की मूर्ति को चोरी के बाद 18 मई, 2013 को ही मथुरा से बरामद भी कर लिया। लेकिन पुरातत्व विभाग की अनदेखी व कानूनी प्रक्रिया के चलते मूर्तियां 7 साल से पुलिस थाने के मालखाने में ही रखी हुई है। मंगलवार को ओसियां मुंसिफ न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ सांदू ने मंदिर पुजारी हुकमदास वैष्णव की अर्जी पर फैसला सुनाते हुए कहा कि मूर्तियों को मालखाने से आजाद कर पुनः उन्हें मंदिर में स्थापित की जाए। मूर्तियां चोरी के आरोपी प्रेमसिंह उर्फ बॉबी पुत्र जयपाल जाटव निवासी मथुरा व सतपालसिंह को पहले ही सजा सुनाई जा चुकी हैं।
सीसीटीवी लगाने के आदेश
न्यायालय ने अपने आदेश में पुरातत्व विभाग जोधपुर को उक्त मूर्तियों की यथा स्थान सुरक्षा सुनिश्चित करने के संबंध में उक्त स्थान पर लाइट सहित मंदिर में सीसीटीवी कैमरे लगाने के भी निर्देश दिए। पुलिस स्टाफ का कहना है कि 11 फरवरी, 2013 को चोरों द्वारा देर रात मंदिर से तीन प्राचीन मूर्तियों को चुराने के मामले में 11 मई, 2013 को ही पुलिस ने मथुरा से चोरी हुई मूर्तियां बरामद कर ली थी। तब से ये मूर्तियां मालखाने में ही रखी है। थाने के मालखाने में इन मूर्तियों की हम स्टाफ भी प्रतिदिन पूजा करते हैं। साथ ही मालखाने का दरवाजा कभी भी हम बंद नहीं कर सकते।
फैसले के बाद सेवग समाज में खुशी
पिछले 7 साल के लंबे समय से लंबित मामले में मंगलवार को कोर्ट के मूर्तियों को फिर से मंदिर में स्थापित करने के फैसले के बाद सेवग समाज के अध्यक्ष चेतनलाल, ओमप्रकाश, रामेश्वरलाल सहित समाज के लोगों ने अपनी कुलदेवी पीपलाज माता की जयकार करते हुए खुशी जाहिर की। कोर्ट में लंबित मामले के चलते ग्रामीण थाने के मालखाने में ही माता की पूजा-अर्चना करते थे। इतना ही नहीं शांडिल्य गौत्र के लोग अपने घरों में शादी ब्याह के बाद जात लगाने व बच्चों के झड़ूले मुंडन भी यहां मालखाने में ही देवी की मूर्ति के सामने करवा रहे थे। समाज के दीपक सोनू शर्मा ने बताया कि उनकी शादी 1 मई, 2014 में हुई थी। लेकिन उन्होंने अपनी शादी की जात मंदिर में ही देने का प्रण लिया था। अब मूर्तियों के मंदिर में फिर से स्थापित होने के बाद जात झड़ूले सहित धार्मिक कार्यक्रम मंदिर में हो पाएंगे।